ये आकाशवाणी है यशवन्त कोठारी ये आकाशवाणी है, अब आप यशवन्त कोठारी से आकाशवाणी पर एक समीक्षात्मक व्यंग्य टिप्पणी सुनिये। शहर मंे आकाशवाणी केन्द्र का होना पत्रकारांे, लेखकांे, कलाकारांे, बुद्धिजीवियांे, वगैरा-वगैरा किस्म के लोगांे के लिए अत्यन्त आवश्यक हैं, जब से आकाशवाणी खुली है, सभी श्रमजीवी पत्रकार श्रम करना बन्द करके आकाशवाणीजीवी हो गये हैं। लेखकांे ने काफी हाउस छोड़कर आकाशवाणी के बाहर मोर्चा जमा लिया है। पता नहीं कब किस प्रकार के प्रोग्राम मंे कौन प्रोग्राम एक्ज्यूकेटिव उन्हंे कहां फिट कर ले। कुल मिलाकर स्थिति ऐसी है कि सन्नाटा साहित्य से