Bayaan - Part 17

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Part 17 "अगले चार महीने..."ये चार महीने मेरी ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत भी थे...और सबसे मुश्किल भी।क्योंकि मेरी हर सुबह उनके "गुड मॉर्निंग" से शुरू होती थी और हर रात उनके "सो जाओ, देर हो गई है" पर खत्म होती थी।मेरी खुशी अब किसी जगह या किसी चीज़ में नहीं थी...मेरी खुशी सिर्फ़ अभिन्नव से बात करने में थी।लेकिन इन्हीं चार महीनों में मैंने उनका एक ऐसा रूप भी देखा...जिससे मैं पहले कभी नहीं मिली थी।अभिन्नव को बहुत गुस्सा आता था।इतना ज़्यादा कि गुस्से में वो कई बार ऐसी बातें बोल देते थे...जो सीधे मेरे दिल पर जाकर लगती थीं।कई बार