पिंजरे की उड़ान

  • 180

दिव्या एक मध्यमवर्गीय, संपन्न परिवार की लड़की थी। घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी, लेकिन फिर भी उसे हमेशा लगता था कि उसके हिस्से का प्यार कहीं खो गया है।उसके परिवार में मम्मी, पापा, छोटा भाई और दादी रहती थीं। मम्मी-पापा दोनों ही अपने दोनों बच्चों से बराबर प्यार करते थे, लेकिन दादी की सोच अलग थी। उनके लिए बेटा ही वंश का चिराग था और बेटी सिर्फ़ पराया धन।जब भी घर में कोई अच्छी चीज़ आती, दादी सबसे पहले उसे दिव्या के भाई को देतीं।"मेरा पोता है... इसे सबसे पहले मिलेगा," दादी गर्व से कहतीं।दिव्या मुस्कुरा देती,