-धीरे रात हो गई। रणविजय अपने कमरे में आया। उसकी नज़र बिस्तर पर गहरी नींद में सोई अंकिता पर पड़ी। वह इतनी खूबसूरत लग रही थी कि किसी भी हीरोइन की खूबसूरती उसके सामने फीकी पड़ जाए। कुछ पल के लिए रणविजय का गुस्सा और नफ़रत उसके मन की उलझनों में खो गए। उसने खुद को समझाने की कोशिश की, लेकिन उसकी नज़रें बार-बार अंकिता पर ही टिक जाती थीं।वह धीरे-धीरे उसके करीब आया और अनायास ही उसके होठों को चूम बैठा। उस पल वह अपनी सारी नफ़रत भूल चुका था और बस अपनी भावनाओं में बह गया था।कुछ देर