महक और देव दोनों सुबह-सुबह रिसोर्ट लौट आए।देव ने आते ही आदरपूर्वक ताया जी के चरण छुए।ताया जी ने उसे सीने से लगा लिया — उस आलिंगन में आशीर्वाद और अपनापन दोनों शामिल थे।महक थोड़ी झुकी-झुकी नज़रों के साथ आगे बढ़ी और ताया जी के पांव छू लिए।ताया जी ने उसका सिर सहलाया, लेकिन कुछ कहा नहीं — जैसे सब कुछ समझकर भी कुछ भी कहने का समय अभी नहीं आया हो।थोड़ी ही देर में आलोक और सुधा भी वहां पहुंच गए।उनकी नजरें देव और महक के चेहरों पर ठहर गईं — उन दोनों के भावों में जो शांति और