तेरी मेरी खामोशियां। - 18

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कमरे में खामोशी इतनी गहरी थी कि नायरा की तेज़ होती सांसें साफ सुनाई दे रही थीं। अमन की तेज़ और तल्ख नज़रें नायरा पर जमी थीं, जबकि निखार एक कोने में खड़ी अपनी जीत की मुस्कान छिपाने की कोशिश कर रही थी।नायरा ने अपनी जलती हुई कलाई को दूसरे हाथ से थाम लिया। उसने अमन की आँखों में देखा—वहाँ नफ़रत नहीं, बल्कि एक ऐसा डर था जो अमन को सच देखने से रोक रहा था।"अमन जी..." नायरा की आवाज़ में कांपती हुई मगर गहरी सच्चाई थी, "अगर आप मेरी बात का यकीन नहीं करना चाहते, तो न करें। लेकिन...