तेरी मेरी खामोशियां। - 15

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सुबह की ताज़ा धूप जब सुल्तान मेंशन के आँगन में उतरी, तो घर में चहल-पहल शुरू हो चुकी थी। नायरा रात भर ठीक से सो नहीं पाई थी, मगर अपने जज़्बातों को चेहरे पर छुपाकर वह सुबह-सुबह ही रसोई में अम्मी और सानिया भाभी की मदद के लिए पहुँच गई।दादी के कहे मुताबिक, आज नाश्ते के बाद अमन को कुछ ज़रूरी कागजात लेकर शहर के बड़े वकील के पास जाना था। दादी चाहती थीं कि अमन अपनी ज़िम्मेदारी समझे, इसलिए उन्होंने साफ़ कह दिया था कि नायरा भी इस बहाने बाहर घूम आएगी और अमन के साथ ही जाएगी।अमन दादी