तेरी मेरी खामोशियां। - 14

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हॉल के उस तनावपूर्ण माहौल के बाद रात धीरे-धीरे सुल्तान मेंशन पर हावी हो रही थी। दरगाह की थकान और निखार के तंज की कड़वाहट लिए नायरा अपने कमरे में आई। यह कमरा अब उसका भी था, मगर यहाँ की हर चीज़ में अमन की शख्सियत की तरह एक अजीब सी ठंडी खामोशी थी।नायरा ने आईने के सामने खड़े होकर अपने गुलाबी सूट का दुपट्टा उतारा। आईने में उसने अपनी आँखें देखीं, उनमें आँसू नहीं, बल्कि एक अजीब सा संकल्प था। दादी से किया वादा उसकी रूह में उतर चुका था।तभी कमरे का दरवाज़ा खुला। अमन अंदर आया।उसने अपनी शेरवानी