“विद्येविना मती गेली, मतीविना नीती गेली।नीतीविना गती गेली, गतीविना वित्त गेले।वित्ताविना शूद्र खचले, इतके अनर्थ एका अविद्याने केले।।”ज्योतिबा फुले जी कहते हैं कि शिक्षा (ज्ञान) के बिना बुद्धि चली जाती है। जब बुद्धि नहीं होती, तो इंसान की नैतिकता (सही-गलत की समझ) समाप्त हो जाती है। जब नैतिकता नहीं होती, तो जीवन की प्रगति (विकास) रुक जाती है। प्रगति रुकने से धन और समृद्धि चली जाती है। और धन-सम्मान के बिना इंसान पूरी तरह टूट जाता है। जरा सोचिए, ये सारे अनर्थ सिर्फ एक 'अज्ञानता' (शिक्षा न होने) के कारण होते हैं।अक्सर लोग इस वाणी को केवल एक सामाजिक भाषण