ब्रह्मराक्षस का साया

  • 462
  • 159

सुखपुर नाम का वह गाँव कभी अपनी असीम हरियाली, लहलहाते खेतों और आपस में मिल-जुलकर रहने वाले सीधे-सादे लोगों के लिए जाना जाता था। चारों तरफ ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों की कतारें और गाँव के मुहाने पर फैला घना, डरावना जंगल इस जगह को खूबसूरत बनाते थे। प्रकृति की गोद में बसे इस गाँव को देखकर कोई बाहरी इंसान यह अंदाजा नहीं लगा सकता था कि यहाँ की रातों में मौत का सन्नाटा पसरा रहता है। गाँव के लोग एक अजीब और रोंगटे खड़े कर देने वाले डर के साए में जी रहे थे, और वह साया था ब्रह्मराक्षस का। गाँव के