श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 37

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प्रिया ,अनिरुद्ध और सार्थक की बात सुन चुकी थी उसके पैरों तले जमीन खिसक गई )(ये बात सुन के प्रिया की आंखों में अनकहा गुस्सा था उसे खुद नहीं पता था कि उसे गुस्सा क्यो आ रहा है )सार्थक जैसे ही पीछे मूढ़ता है , उसे प्रिया दिखाई देती है ... सार्थक मन में— कही प्रिया जी ने मेरी और अनिरुद्ध की बात तो नहीं सुन ली क्या बोलूं अब मैं? प्रिया वहां से जाने को हुई .... सार्थक पीछे से उसे आवाज लगा के बोलता है — प्रिया जी ,प्रिया उसे अनदेखा कर वहां से जा रही थी सार्थक उसके