श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 36

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हरि और श्री आपस में बात कर रहे थे हरि — मेरे जीवन में क्या विरह ही लिखा है प्रियतमा जी  श्री— हरि जी ... हमे जाने दीजिए ये सब आप क्या बोल रहे है हरि—मैं क्या बोल रहा हु आपकोसमझ नहीं आ रहा क्या प्रियश्री— नहीं मुझे जाना है  हरि श्री के ओर करीब आते हुए श्री से बोलता है  ... क्यो जाना है आपको  ? श्री— देखिए ... आप .. आप हम से दूर होके बात कीजिए पहले तो और हमने कहाँ न जाना है हमे अभी यहां से 🫣हरि— अच्छा चली जाना मैं कहा रोक रहा हु