अशोक का परिवर्तन - युद्ध से करुणा तक - 3

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सम्राट अशोक का परिवर्तनभाग 3 – धम्म का संदेश और भारत से विश्व तक की यात्राकलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक केवल एक राजा नहीं रहे, बल्कि शांति और करुणा के दूत बन गए। उन्होंने निश्चय किया कि अब उनकी सबसे बड़ी विजय लोगों के हृदय जीतना होगी।राजधानी पाटलिपुत्र में एक विशाल सभा बुलाई गई। मंत्री, सेनापति, विद्वान और भिक्षु उपस्थित थे। अशोक ने कहा—"आज से मेरी सबसे बड़ी शक्ति तलवार नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और करुणा होगी।"इसके बाद पूरे साम्राज्य में धम्म के संदेश अंकित करवाए गए। बड़े-बड़े पत्थरों और स्तंभों पर यह लिखा गया कि सभी धर्मों का