तुम और मैं - 4

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2020 से 2022 तक के उन दो सालों के इंतज़ार की घड़ियाँ, जब अंततः 2022 में उस 'हाँ' में बदलीं, तो लगा जैसे कोई बहुत बड़ा बोझ उतर गया हो। कान्हा के लिए वह सिर्फ एक शब्द नहीं था, बल्कि उन दो सालों की मेहनत और धैर्य की सबसे बड़ी जीत थी। मैं आज भी उस पल को याद करती हूँ तो महसूस होता है कि कान्हा की खुशी कितनी मासूम और सच्ची थी। वह खुशी किसी बड़े इनाम जैसी नहीं, बल्कि एक बहुत ही सुकून भरी मुस्कान जैसी थी—जैसे एक लंबे सफर के बाद उन्हें अपना घर मिल गया