वेदांत 2.0 का 0–9 मॉडल एक ऐसा संरचनात्मक ढाँचा प्रस्तुत करता है जो साधारण दशमलव संख्या‑पद्धति को अस्तित्व की दस मूल अवस्थाओं के रूप में पुनर्पाठित करता है। इस दृष्टि में 0 से 9 तक के अंक मात्र गणनात्मक प्रतीक नहीं, बल्कि क्रमशः ब्रह्मांडीय और मानवीय विकास के विशिष्ट टोपोलॉजिकल पड़ाव हैं। 0 को यहाँ शून्यता नहीं, बल्कि “अप्रकट समग्रता” के रूप में सोचा गया है – ऐसा मौन बीज जिसमें समस्त संभावित संरचनाएँ निहित हैं, पर अभी विभाजन, दिशा और समय के रूप में उभरी नहीं हैं।0 से 1 तक की गति “केंद्र” और “मैं‑भाव” की स्थापना है, जबकि