Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे।अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।"उफ़्फ... बंद हो जा यार..."लेकिन अलार्म लगातार बजता रहा।आख़िरकार उसने झुंझलाकर बिस्तर के पास रखे मोबाइल की तरफ़ हाथ बढ़ाया। आधी बंद आँखों से स्क्रीन पर उँगली फेरी और अलार्म बंद कर दिया।मोबाइल की स्क्रीन पर समय चमक रहा था—07:00 AMउसने मोबाइल वापस तकिए के पास रख दिया और लंबी साँस लेकर फिर से आँखें बंद कर लीं।"बस... पाँच मिनट और..."यह उसका रोज़ का बहाना था।लेकिन आज किस्मत उसके पक्ष