Part 16 डायरी का अगला पन्ना पलटते ही मेरे चेहरे पर एक सुकून-सी मुस्कान आ गई। पिछले कई पन्नों से बस आँसू, इंतज़ार और गलतफ़हमियाँ ही पढ़ रही थी। न जाने क्यों, अब मन कर रहा था कि एक बार तो राधा रानी की ज़िंदगी में भी खुशियाँ आएँ। और शायद... इस बार किस्मत भी उन दोनों पर थोड़ी मेहरबान होने वाली थी।"लगभग आठ-नौ दिन बाद..."इतने दिनों की खामोशी के बाद एक दिन आनंद मेरे पास आया। उसके हाथ में एक तह किया हुआ कागज़ था।उसने चुपचाप वह कागज़ मेरी तरफ़ बढ़ाया और कहा—"अभिन्नव भैया ने दिया है।"मेरे हाथ काँपने