रमेश अपनी पत्नी फरजाना की बेवफाई से भीतर ही भीतर टूट चुका था। कभी हँसी, विश्वास और अपनत्व से भरा उसका घर अब अजीब-सी खामोशी का बसेरा बन गया था। डॉक्टर सुहैल से फरजाना की बढ़ती निकटता ने उसके जीवन की सारी खुशियाँ जैसे छीन ली थीं।दोनों प्रतिष्ठित डॉक्टर थे। धन, सम्मान, प्रभाव और समाज में ऊँचा स्थान—सब कुछ उनके पास था। रमेश एक साधारण इंजीनियर था। उसके पास न सत्ता थी, न पहुँच और न ही ऐसा कोई साधन जिससे वह इस संबंध के विरुद्ध खुलकर खड़ा हो पाता। कानून, समाज और परिस्थितियाँ—तीनों उसे असहाय बना रही थीं।लेकिन उससे