दादी के हाथ का जादुई अचार

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*शीर्षक: दादी के हाथ का जादूई अचार*  *लेखक: आकांक्षा दुबे* गर्मी की छुट्टी थी। गांव में आम के पेड़ के नीचे ढेर सारे कच्चे आम पड़े थे। मैं भाग के दादी के पास गई और बोली "दादी आज अचार बनाएंगे?" दादी हंस के बोली "हां मेरी गुड़िया, चल चाकू ले आ।"दादी का अचार पूरे गांव में मशहूर था। जो एक बार खा लेता, वो स्वाद जिंदगी भर नहीं भूलता था। इतना लजीज था कि आज भी बुजुर्ग बैठ के याद करते हैं "दादी के हाथ वाला आम का अचार... हाय क्या बात थी!"दादी के पास न कोई किताब थी, न मोबाइल। बस