गांव की शाम का अपना ही मज़ा है। शहर में तो बस ट्रैफिक और हॉर्न सुनाई देते हैं, पर यहाँ चूल्हे की आग, तुलसी के पास दिया, और माँ की लोरी सुनाई देती है। बिजली चली जाए तो क्या, चाँदनी रात में सबसे ज़्यादा रोशनी दिल में होती है।गांव की वह शाम सबसे सुंदर होती है। जहाँ सब अपने घर से निकल कर बरगद के पेड़ के नीचे बैठते हैं। बहुत सारे किस्से होते हैं। ना फोन का टेंशन, ना कोई डिप्रेशन। खुला आसमान और शांति। यही बात है कि मुझे शहर से ज़्यादा गांव पसंद है।बरगद के नीचे बैठ