Devil की दास्तान - 28

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(शाम का वक्त है। हल्की बारिश हो रही है। सड़क किनारे एक पुरानी लकड़ी की बेंच पर सिमरन बैठी है।उसका चेहरा भीगा हुआ है — बारिश से भी, और आँसुओं से भी।)(उसके बाल बिखरे हुए हैं, होंठ काँप रहे हैं।वो अपनी गोद में रखे छोटे बैग को कसकर पकड़े हुए है —जैसे वही अब उसकी आख़िरी पहचान हो।)सिमरन (धीरे-धीरे खुद से, रुँधी आवाज़ में) बोली - “कितना आसान था सब उनके लिए...एक दिन में सब भूल गए... और मैं...”(आँखों से आँसू गिरते हैं)“मैं आज भी उनकी वही सिमरन हूँ... वही जो उनकी परवाह करती है...”(पास से गाड़ियाँ निकलती हैं, कोई उसकी