जिस जीवन में तुम थे - 5

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सितंबर की शुरुआत थी।वर्ष का वह समय जब पेड़ हरे तो रहते हैं, लेकिन उनकी हरियाली में एक थकान उतरने लगती है।जैसे मौसम को पहले से पता हो कि पतझड़ दूर नहीं।समर ने उस दिन एक अजीब बात महसूस की।उसे अन्विता का इंतज़ार पहले की तरह नहीं सताता था।अब वह उसके साथ रहने लगा था।उसकी अनुपस्थिति में भी।उसके मौन में भी।उसकी कल्पना में भी।और यही वह क्षण था जहाँ प्रेम अपने सबसे ख़तरनाक रूप में प्रवेश करता है।जब कोई व्यक्ति वास्तविकता से निकलकर हमारी आंतरिक दुनिया का हिस्सा बन जाता है।उस दिन अन्विता का पत्र असामान्य रूप से लंबा था।समर