अन्धा प्रेम राम जनपद के शङ्कर पुर गाँव में जयराम नामक एक युवक रहता है। उसकी पत्नी का नाम उपासना है। वे दोनों एक कुशल मङ्गल, ऐश्वर्य, समृद्धिशाली सुन्दर युग्म के दम्पति हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि को रात्रि के निशीथ काल के आरम्भ में अपने कक्ष में एक पलङ्ग पर बैठकर, झरोखा से चन्द्र देव को प्रेम से निहारते हुए दोनों दम्पति एक दूसरे से मधुर वाणी में रमणीय बातें कर रहे थे। जयराम नें कहा - हे प्रिय अर्धाङ्गिनी! हे मृगनयनी! तुम अपनी इस मृगी के समान सुन्दर नेत्रों