सजा.....बिना कसूर की - 6

  • 168
  • 72

तभी भूमि आते हुए दिखाई देती है।आकाश ऐसे खुश होता है मानो कोई खजाना मिल गया हो।भूमि ने चारों ओर नजर फैला कर देखा, उसे कॉर्नर की टेबल पर बैठा हुआ आकाश दिखाई दिया।आकाश ने भी भूमि को देख लिया था उसने हाथ उठा कर अपनी उपस्थिति जाहिर की। भूमि टेबल की और चल पड़ी जाते ही आकाश से बोली गुड इवनिंग !!आकाश मैं भी गुड इवनिंग कहा और खड़े होकर भूमि के लिए कुर्सी खींची और भुमि को  बैठाया फिर खुद भी अपनी कुर्सी पर बैठ ‌गया।कुर्सी पर बैठते ही बोला-बहुत खूबसूरत लग रही हो !भूमि बोली --मैं इतनी सुंदर भी नहीं