पंखों का बोझ - 2

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The Reluctant Heir.           2                         विरासत का बोझयह वो जगह थी जहाँ हर कोई मोक्ष की तलाश में आता था।संजना मिश्रा आज यहाँ अपनी इच्छाओं का गला घोंटने आई थी।घाट पर सुबह की धुंध अभी पूरी तरह छंटी नहीं थी। गंगा की लहरें किनारे से टकरा रही थीं — धीरे, लगातार, बिना किसी से पूछे। मंदिरों की घंटियाँ और नाविकों की आवाज़ें मिलकर एक ऐसा शोर बनाती थीं जो किसी तरह शांत भी लगता था।"हेलो दोस्तों! मेरा नाम है शत्रु और आज मैं आपको लेकर आया हूँ दुनिया के सबसे