Devil की दास्तान - 26

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(रात का सन्नाटा फैला हुआ है। बाहर ठंडी हवा बह रही है।कमरे में हल्की पीली रौशनी जल रही है। दीवारों पर परछाइयाँ कांप रही हैं।)(सिमरन बिस्तर पर पड़ी है — चेहरा पसीने से भीगा हुआ, सांसें तेज़ चल रही हैं।वो अपने पेट को पकड़कर तड़पती है।)सिमरन (धीरे-धीरे कराहते हुए) बोली - “आह... भगवान... बहुत दर्द हो रहा है...अब और नहीं सहा जाता...”(वो करवट बदलने की कोशिश करती है लेकिन दर्द इतना ज़्यादा है कि आँसू अपने आप बह निकलते हैं।)सिमरन (धीरे-धीरे रोते हुए) बोली - “कान्हा जी... बचा लो... अब नहीं सह पाऊँगी...”(करण सो रहा होता है, लेकिन सिमरन की सिसकियाँ सुनकर