पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 - 5

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कॉलेज की छत पर हवा तेज़ चल रही थी। सूरज ढल रहा था। रितांश अब भी डायरी को हाथ में पकड़े खड़ा था।उसका दिमाग एक ही बात पर अटका हुआ था—पापा ज़िंदा हैं...उसने गहरी साँस ली। फिर सिद्धिदात्री की तरफ देखा।वो बोला - मुझे अपने पापा को ढूँढना है। कृष्णा अग्निहोत्री को।यह नाम सुनते ही...सिद्धिदात्री के चेहरे पर हैरानी उभर आई।वो बोली - क्या कहा?कृष्णा अग्निहोत्री?अब हैरान होने की बारी रितांश की थी।वो बोला - तुम उन्हें जानती हो?सिद्धिदात्री कुछ पल सोचती रही।फिर बोली—जानती तो नहीं...लेकिन उनका नाम बहुत बार सुना है।ज्यादा याद नहीं है पर जब मैं छोटी थी इस नाम का