शिक्षा नहीं , मनुष्य निर्माण

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शिक्षा नहीं, मनुष्य निर्माणविज्ञान, विद्या और चेतना का समन्वयआज मानव सभ्यता अपने इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ ज्ञान का विस्तार अभूतपूर्व है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा, संचार और तकनीकी कौशल ने संसार की तस्वीर बदल दी है। मनुष्य ने समुद्र की गहराइयों को मापा, आकाशगंगाओं तक अपनी दृष्टि पहुँचाई और पदार्थ के सूक्ष्मतम कणों का रहस्य जानने का प्रयास किया। ज्ञान का विस्तार इतना व्यापक हो चुका है कि कोई एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में उसका एक छोटा-सा भाग भी पूर्णतः आत्मसात नहीं कर सकता।किन्तु इस अद्भुत प्रगति के बीच कुछ प्रश्न आज भी मानवता