कलावती हॉस्पिटल के लेबर रूम में प्रसव पीड़ा को चुपचाप सहन कर रही थी रेशमा…ना कोई चीख, ना चित्कार…बस चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी।पीला पड़ा चेहरा और सफेद होती आँखें किसी और ही दर्द की गवाही दे रही थीं —यह दर्द केवल प्रसव का नहीं था,यह उस तकलीफ़ का था जो शायद खुदा ने उसकी किस्मत में लिख दी थी।रेशमा की कोख से चौथा बेटा जन्मा।वह भी अपनी माँ की तरह बिल्कुल शांत था।फर्क बस इतना था कि माँ के सीने में अभी धड़कन बाकी थी,और उस नवजात के भीतर… कुछ भी नहीं।उसके पहले तीनों बच्चों की तरहयह