भाग 1: एक अजीब मुलाक़ात**रात के करीब बारह बज रहे थे। आसमान में काले घने बादल छाए हुए थे और मूसलाधार बारिश हो रही थी। पूरा शहर मानो गहरी नींद में सो चुका था, लेकिन सड़कों पर सन्नाटा चीरती हुई एक महँगी काले रंग की गाड़ी तेज़ी से दौड़ रही थी।गाड़ी की पिछली सीट पर बैठा था अथर्व सिंघानिया। शहर का सबसे बड़ा, रसूखदार और बेहद गुस्सैल बिजनेसमैन। अथर्व के चेहरे पर हमेशा एक कड़कपन रहता था। वह अपनी ज़िंदगी में सिर्फ दो ही चीज़ें जानता था — अनुशासन और हर हाल में जीत।बारिश की बूंदें गाड़ी के शीशे पर