जैसे ही शंख की आवाज़ गूँजी, पूरा सूरजगढ़ जाग उठा। गौरी घाट के किनारे बसी उस छोटी-सी बस्ती में हर सुबह यही होता था — पुजारी शंकर जी पूजा खत्म करते, शंख फूँकते, और जैसे पूरा माहौल एक पल के लिए पवित्र हो उठता।प्रसाद बाँटते वक्त मुखिया जी सबसे पहले आगे आए।"पंडित जी, जल्दी दीजिए — आज बिटिया की गोद भराई है, घर में मेहमानों का ताँता लगा है।"शंकर जी ने उनके हाथ में प्रसाद रखते हुए मुस्कुराकर कहा, "महिमा बिटिया को हमारा आशीर्वाद देना।"मुखिया जी ने नमस्कार किया और चले गए।घर पहुँचे तो कुसुम दरवाज़े पर ही चाय लेकर