श्री अब सार्थक और प्रिया को सुना रही थी ..श्री— बताइए किस बात पे हो रही थी इतनी बहस सार्थक— सखी जी ये प्रिया जी आई हमारे पास की अब सिखा दो ध्यान करना हम भागवत पाठ के अध्ययन में व्यस्त थे और ये यहां आ कर मुझे बुद्धू जी बोल रही थी श्री— तोसार्थक — श्री कभी किसी ने ऐसे बात नहीं की मुझसे जैसे ये प्रिया करती है श्री— सार्थक जी क्या आप जानते है कि हमने बचपन से क्या क्या सुना है , केवल अपने ऐसे शरीर के कारण तब भी हम विचलित नहीं हुए