अब श्री का मन तो बस भगवान नारायण के लिए भारी हो रहा था वो किसी भी कीमत पे बस अपने प्रभु से दूर नहीं होना चाहती थी गुरुदेव ने सब को एक नजर देखा अब गुरुदेव बोले — श्री पुत्री यहां आइये हमारे पास श्री:— जी गुरुदेव गुरुदेव — पुत्री सबसे पहले तो आपको बहुत बहुत बधाई आप अब अपने जीवन में अपने सपनों को पूरा कर चुकी है और कामयाब हो चुकी हैं श्री — जी गुरुदेव धन्यवाद आपके आशीर्वाद से ही संभव हो पाया है आपका आशीर्वाद न होता प्रभु नारायण की कृपा न होती तो कभी न कर