अब हरि को श्री राधावल्लभ जी का आशिर्वाद मिल चुका था और अब उसे ये विश्वास था कि श्री उसे मिल जाएगी ।सभी लोग अब होटल पहुंचते है और दोपहर का भोजन करने के लिए रेस्टोरेंट आते है ।सभी लोगों से पहले श्री और हरि आ जाते है खाना खाने।श्री जब अपनी कुर्सी पे बैठी तभी हरि उसके बगल वाली कुर्सी पे बैठ गया । श्री वहां से अब उठना चाहती थी लेकिन हरि ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसने कहा कि चुप चाप यही बैठो प्रिय नहीं तो सब के सामने अभी हमारी शादी का विषय छेड़ दूंगा