श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 12

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श्री वहाँ से जाने लगी हरि ने उसका हाथ पकड़ लिया श्री ने खुद को छुड़वाना चाहा लेकिन हरि के मजबूत हाथों से खुद को नहीं छुड़वा पाई ।श्री ने कहा हरि जी हमारा हाथ छोड़िए हरि ने कहां ये हाथ छोड़ने के लिए नहीं पकड़ा है जीवन भर इस हाथ को थामना चाहता हु मैं। श्री ने कहा – क्या कहे रहे है आप हरि जी क्यों चाहते हो आप ऐसा क्यों? हरि ने कहां — श्री प्रेम क्यों हुआ ये पूछ रही हो?️हो गया क्या करूं अब नहीं रह सकता तुम्हारे बिना शादी करना चाहता हूं तुमसे मैं ।श्री–