श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 11

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कमरे मे आकर  सीता आंटी ने श्री को समझाने का निर्णय लिया सीता आंटी ने कहा श्री मुझे तुमसे कुछ बात करनी है बेटा श्री:- जी आंटी कहिए आपको क्या बात करनी है हमसे सीता आंटी:- देखो श्री मैं जानती हूँ  हरि तुम्हारे लिए क्या महसूस करता है ..श्री ने कहा – आंटी जी इन सब बातों का अब मेरे जीवन में कोई मूल्य नहीं है  जानती हूं आप क्या कहना चाहती हैं लेकिन मेरी बात को भी समझिए आंटी जी कृपा कर के ...सीता आंटी को अब श्री की बात सुनके क्रोध आया उन्होने कहा बस श्री बस तुम अपने मन