श्री और हरि आपस में बात कर रहे थे की तभी हरि का फोन बजा वो वहां से चला गया । श्री ने अपनी दिनचर्या चालू रखते हुए शुर्यनमस्कार(योग) करना प्रारंभ किया । फोन कट होने के बाद हरि दुबारा जब किचेन की तरफ आ रहा था तब वो श्री को योगा करते हुए देख रहा था ।श्री ध्यान लगाने के बाद नित्य ही योगा भी करती थी । ध्यान और योग से श्री का शरीर और भी ज्यादा आकृषित होता जा रहा था । हरि चाह कर भी श्री से अपनी नजर नहीं हटा पा रहा था । श्री