Money Vs Me - Part 11

 मैं एक बार फिर से उसी सिचुएशन में खड़ा था, जहाँ 8 साल पहले था। तब मैंने अपना घर छोड़ा था, और आज फिर से वही सब रिपीट हुआ। एक बार फिर सब कुछ पीछे छोड़कर मैं दूसरे अनजान शहर आ गया। मुझे नहीं पता था कि इस बार क्या होने वाला है, किस्मत मुझे कहाँ तक आज़माने वाली है। लेकिन फिलहाल मेरे सामने सबसे बड़ा सवाल फिर से वही था—रहने के लिए घर और खाने के लिए दो वक्त की रोटी का। 3-4 दिन फिर से परेशान रहने के बाद मुझे आखिर रहने और खाने का बंदोबस्त हो ही