अनबुझा चूना

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                 घड़ी में तीन बजे थे जब जाई बिस्तर से उठ कर बैठ ली थीं।                  “पानी चाहिए?” मैं ने पूछा।                  “सोती नहीं क्या तू?” जाई ने हैरानी जतलाई,  “इधर मैं हिलती भी हूं तो तू चौकन्नी होकर मेरे पास लपक आती है….”                   पिछले माह जब हमारे पिता की मृत्यु हुई थी तो हम तीन बहनों ने तय किया जाई बारी- बारी से अब तीन- तीन महीनों के लिए