जुलाई की बारिश दिल्ली को हमेशा थोड़ा उदास बना देती थी।शाम के सात बजे थे। कनॉट प्लेस के एक कैफ़े में बैठे-बैठे कियान मल्होत्रा अपने लैपटॉप की स्क्रीन पर झुका हुआ था। सामने कॉफी कब की ठंडी हो चुकी थी। लेकिन उसकी आँखें हर दो मिनट में फोन की स्क्रीन पर चली जाती थीं।"Last seen today at 11:11 AM."बस इतना ही,पिछले तीन दिनों से अदिति का यही आखिरी निशान था। उसके अलावा न कोई मैसेज,न कोई कॉल,न कोई नया पॉडकास्ट,न इंस्टाग्राम पर कोई स्टोरी......कुछ भी नहीं।और यह पहली बार नहीं था।दोनों के बीच चुप्पियाँ नई नहीं थीं।उनकी कहानी की शुरुआत