वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी घर का छोटा सा कमरा-एक अलमारी, कुछ शीशियां, एक स्टेथोस्कोप कोने में रखे चिकित्सा उपकरण, और मद्धिम सी रोशनी डॉक्टर सरला का युद्ध क्षेत्र था। शहर उस रात चुप था। सर्द हवा खिड़की के पर्दों को बार-बार हिला रही थी जिसमें डर की नमी थी। घर के बंद दरवाज़े में दबे स्वर थे। बाहर दो क़ौमो के अलग-अलग नारों की गूंज। सरला सोचती है, दुनिया दो हिस्सों में बट गई है। दरवाज़े पर दस्तक होती है-धीमी, कांपती हुई। वह झिरी से झांकती है-बुर्का ओढ़े लड़की, पीछे उसकी बूढ़ी मां।