*'बहु-पुराण' - ये कहानी नहीं, हर उस औरत का दस्तावेज है जिसने गाँव की मिट्टी से शहर के अकेलेपन तक का सफर तय किया है।*शीर्षक: बहु-पुराण* *- सुबह से बारिश हो रही थी। मौसम सुहावना हो गया था। ठंडी हवाएं चलने लगी। एक कप कॉफी का लेकर बालकनी में जाकर बैठी नेहा यादों में खो गई जब वो पिछले साल अपनी ननिहाल गई थी और मामी से मिलना हुआ था। बेचारी मामी कितना कुछ झेला उन्होंने। इस दुनिया में सबकी एक कहानी है।समझ नहीं आता ये कैसा समय चल रहा है। जिसे देखो वो उदास, दुखी नजर आता है। दुख की कैसी