------------------------------ अध्याय 8: मृत्यु और जीवन का उद्देश्य (अंतिम सच: श्मशान का सन्नाटा या चेतना की मुक्ति?)------------------------------ भाग 1: तुम मृत्यु से नहीं डरते, तुम अपनी अधूरी जिंदगी से डरे हुए होआइए आज तुम्हारे जीवन के उस सबसे बड़े, सबसे गहरे और इकलौते अटल सच का मुखौटा उतारते हैं जिससे भागने के लिए तुम अपनी पैदाइश के पहले दिन से छटपटा रहे हो—'मृत्यु' (Death)।तुम जब भी 'मृत्यु' शब्द सुनते हो, तुम कांप जाते हो। तुम इसे एक अशुभ शब्द मानते हो, इस पर बात करने से बचते हो, और सोचते हो कि इसके बारे में न सोचने से तुम अमर हो