महक रिसेप्शन की ओर बढ़ ही रही थी कि पीछे से किसी ने सख़्त आवाज़ में पुकारा—"महक!"वो ठिठक गई। मुड़कर देखा तो सुधा और आलोक सामने खड़े थे।सुधा की आँखों में गुस्सा था, और आलोक की आँखों में नाराज़गी।"इतना बड़ा फ़ैसला अकेले कैसे ले सकती हो तुम?" सुधा की आवाज़ थरथरा रही थी।महक ने कुछ नहीं कहा, बस सिर झुका लिया।आलोक चुपचाप खड़े रहे, पर उनकी ख़ामोशी बहुत कुछ कह रही थी।सुधा ने इशारे से दोनों बच्चों को कमरे में भेज दिया।बच्चे ख़ुश थे, उनके चेहरों पर एक सुकून था।"थैंक्यू!" कहते हुए वो अंदर चले गए।सुधा ने एक गहरी साँस