सफ़ेद शॉल - 2

तारा बहुत देर तक उस लिफाफ़े को देखती रही।कमरे में केवल टेबल लैम्प की पीली रोशनी थी।घर सो चुका था।घड़ी रात के दो बजा रही थी।और उसके हाथों में था,यामिनी का अंतिम पत्र।धीरे-धीरे उसने लिफाफ़ा खोला।भीतर केवल एक काग़ज़ नहीं था।एक पुरानी तस्वीर भी थी।तस्वीर में यामिनी थीं।उम्र लगभग पच्चीस वर्ष।और उनके कंधों पर वही सफेद शॉल थी।तारा ने तस्वीर को अलग रखा।फिर पत्र खोला।ऊपर लिखा था,मेरी प्रिय तारा,तारा की साँस अटक गई।यामिनी को पता था...कि यह पत्र वही पढ़ेगी।पत्र आगे बढ़ा,अगर तुम यह पढ़ रही हो,तो इसका अर्थ है कि मैं अब तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर देने के लिए