तुम मेरी आखिरी सांस हो - 34

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एपिसोड 34: अंधेरे की अंतिम परछाईशहर की बेचैनीशहर में शांति लौटती दिख रही थी, लेकिन रोहन के मन में बेचैनी बनी रही। हर जगह ठंडी हवा और रहस्यमयी आवाज़ें अब भी गूँज रही थीं। लोग कहते थे कि रात में कोई उनके कमरे में खड़ा रहता है, पर दिखाई नहीं देता। बच्चों के सपनों में अजीब आकृतियाँ आने लगीं। दुकानों के शीशे अचानक टूट जाते और अस्पतालों में मरीजों ने शिकायत की कि कोई उन्हें दबा रहा है।  रोहन जानता था कि यह शांति केवल एक भ्रम है। अयान की परछाई ने चेतावनी दी—  “यह अंत नहीं है, रोहन। अंधेरा अपनी अंतिम