परिधि पर दौड़ और केंद्र में ठहराव — Vedanta 2.0 का द्वि-छोर जीवनपरिचयआज का जीवन परिधि की दोड़ पर आधारित है। हम ऊपर देखने के लिए टेलीस्कोप खोजते हैं, नीचे देखने के लिए ड्रिल बनाते हैं, लेकिन बीच में जो देखने वाला है — वह छूट जाता है। यह परिधि-केंद्र द्वैत नहीं कोई नया दर्शन है, यह प्राचीन वेदांत का आधुनिक पुनर्यापन है। Vedanta 2.0 में मैं यह प्रस्ताव करता हूँ: जीवन एक छोर चुनने में नहीं, दोनों को जीने की तैयारी में है। परिधि पर पूरी ताकत से दौड़ो, पर रोज़ एक बार शून्य पर लौट आओ। वहीं से