त्याग जीवन की प्राण प्रतिष्ठा है

“त्यागात् शान्तिरनन्तरम्” — यह दिव्य सूत्र हमें बताता है कि त्याग के पश्चात् ही शान्ति का उदय होता है। वास्तव में त्याग जीवन की प्राण-प्रतिष्ठा है। जिस प्रकार किसी मंदिर में देवप्रतिमा की स्थापना के पश्चात् प्राण-प्रतिष्ठा का संस्कार उसे केवल पत्थर की मूर्ति से दिव्यता के केंद्र में परिवर्तित कर देता है, उसी प्रकार त्याग मनुष्य के जीवन में चेतना, उद्देश्य और महानता का संचार करता है। त्याग के बिना जीवन केवल भौतिक अस्तित्व बनकर रह जाता है, किंतु त्याग उसे अर्थ, आदर्श और अमरता प्रदान करता है।मनुष्य का जन्म केवल जीने, खाने, सोने और मृत्यु को प्राप्त होने