मेरे लिए दरवाज़ा बहन ने खोला। “और कौन आया है?” अंदर के बरामदे में अपना सामान पटक कर मैं ने पूछा। “कोई नहीं। पापा ने किसी को नहीं बुलाया,” बहन ने कहा। “मुझे क्यों बुलाया?” तख्त पर बैठ कर मैं ने अपने जूते- मोज़े उतारे ही थे कि मां मेरी आवाज़ सुन कर वहीं बरामदे में चली आयीं।