कहानी बड़ी बेटी* *लेखिका: वन्दना शर्मा*आज पार्क में ज्यादा भीड़ नहीं थी। बारिश होने का मौसम हो रहा था। ठंडी हवाएँ चल रही थी। कुछ बच्चे झूला झूल रहे थे। कुछ महिलाएँ बेंच पर बैठी अपनी-अपनी कहानी सुना रही थी।नेहा अभी पार्क में आई थी, आज उसका मन बेचैन हो रहा था तो सोचा पार्क होकर आती हूँ, मूड सही हो जाएगा। एक खाली बेंच देखकर वहीं बैठ गई। बच्चों को खेलता देख कुछ हल्का महसूस हो रहा था। नेहा का मन नहीं था किसी से बात करने का। कुछ देर वो शांत बैठना चाहती थी। सामने बच्चों को खेलता देख